AUSvIND: भूल कर भी टीम इंडिया न करें ये चार गलतियां, वरना तीसरा टेस्ट भी हारना तय

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AUSvIND: Errors Indian cricket team made before Boxing Day test match
भारत-ऑस्ट्रेलिया एकबार फिर आमने-सामने होने को तैयार है। मौका है ऐतिहासिक बॉक्सिंग-डे टेस्ट का। मेलबर्न के मैदान पर खेला जाने वाला यह सीरीज का तीसरा मैच है। चार मुकाबलों की टेस्ट श्रृंखला 1-1 से बराबर है। ऐसे में 'कोहली की टोली' पर्थ टेस्ट की बुरी यादों को भुलाकर सीरीज में बढ़त लेना चाहेगी। दूसरी ओर पिछले मैच में जीत से उत्साहित मेजबान ऑस्ट्रेलिया इस बार नए प्लान के साथ उतर रहा है। लगातार जुबानी हमलों से न सिर्फ टीम इंडिया पर दबाव बनाया जा रहा है, बल्कि उकसाने का काम भी बराबर हो रहा है।  भारत पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। आइए जानते हैं टीम इंडिया को अपनी किन गलतियों से पार पाना होगा...

सलामी बल्लेबाजी की उलझन

पिछले दोनों टेस्ट मैच में भारतीय टीम को ओपनर्स ने बेहद निराश किया। बड़ा स्कोर न बना पाने का एक अहम कारण टीम को सही शुरुआत न मिलना था। नतीजनत मध्यक्रम पर अतिरिक्त दबाव आ गया।

युवा पृथ्वी शॉ के चोटिल होने के बाद मुरली विजय और केएल राहुल ही विकल्प बचे थे। मगर दोनों ने ही खूब निराश किया। भारतीय ओपनर्स ने अभी तक कुल 97 रन ही बनाए हैं, जिसमें सर्वोच्च साझेदारी 63 रन की रही। 

इसके उलट ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाजों का बल्ला जमकर बोला। दो टेस्ट मैचों में उनकी ओर से 228 रन बनाए गए। तीसरे टेस्ट के लिए मयंक अग्रवाल को बुलाया गया है। बावजूद इसके अगर सलामी बल्लेबाजी एक बार फिर फ्लॉप साबित हुई तो तीसरे टेस्ट में टीम इंडिया को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। 

सही प्लेइंग इलेवन

भारतीय टीम मैनेजमेंट पर्थ की पिच पढ़ने में नाकाम रहा। ऑस्ट्रेलिया ने पिच पर घास छोड़ी। विपक्षियों की इस चाल में विराट कोहली फंस गए। भारतीय कप्तान ने टीम में एक भी स्पिनर नहीं खिलाया। विराट यह भी नहीं समझ पाए कि एक दिन पहले घोषित हुई ऑस्ट्रेलिया की प्लेइंग इलेवन में नाथन लियोन को चुना गया है।

विपक्षी लियोन ने हरी दिखने वाली इस स्पिन फ्रेंडली पिच पर भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ कर रख दी। भले ही आर. अश्विन चोटिल थे, लेकिन रविंद्र जडेजा तो फिट थे और वह बॉलिंग के अलावा अच्छी बैटिंग भी कर लेते हैं। ऐसे में 'बॉक्सिंग-डे' टेस्ट में विराट को सही टीम संयोजन के साथ उतरना ही होगा।

कोहली की अति आक्रामकता

पिछले कुछ समय से भारत-ऑस्ट्रेलिया के मुकाबलों की गर्मी देखने लायक होती है। जैसा रोमांच और खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा जो कभी भारत-पाकिस्तान के बीच होती थी, उसकी जगह अब भारत-ऑस्ट्रेलिया ने ले ली।

सीरीज शुरू होने से पहले ही माहौल बनने लगा था। स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर की गैरमौजूदगी में कमजोर नजर आ रही कंगारू टीम ने जहां साफ किया था कि वे स्लेजिंग नहीं करेंगे। दूसरी ओर कप्तान कोहली ने भी दर्शाया था कि वे अब ज्यादा मैच्योर हो गए हैं। उनका ध्यान विवादों, स्लेजिंग पर नहीं होगा। लेकिन पर्थ टेस्ट में ऐसा नजर नहीं आया। 

भारतीय कप्तान और ऑस्ट्रेलियाई कप्तान टिम पेन आमने-सामने आ गए थे। विपक्षी खिलाड़ियों के साथ-साथ टीम मेंबर्स में दरार जैसी चीजों से पार पाकर भारतीय खिलाड़ियों को सिर्फ खेल पर फोकस करना होगा।

आराम न पड़ जाए भारी

पिछले कुछ समय से देखा गया है कि मौजूदा टीम, प्रैक्टिस से ज्यादा बॉडी हिलिंग और रिलैक्सेशन पर फोकस करती है। पहला टेस्ट जीतने के बाद खुद कोच शास्त्री ने अपने बयान से इसकी पुष्टि भी कर दी थी।

मगर पर्थ में हुए दूसरा टेस्ट गंवाने के बावजूद भारतीय टीम नेट्स पर पसीना बहाने के बजाय आराम करने का विकल्प चुनती है। चार दिन तक कोई अभ्यास न करने के बाद पांचवे दिन खिलाड़ी बल्ला और गेंद पकड़ते हैं। 

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि हारने वाली टीम आराम कैसे कर सकती है? इस वक्त टीम को मिले समय का सही इस्तेमाल सबसे जरूरी है। उम्मीद है 'विराट कोहली की टोली' इस आराम को अपने ऊपर हावी नहीं होने देगी और मैदान पर एक जख्मी शेर की तरह पलटवार करेगी।

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