मोहम्मद रफी बर्थ एनिवर्सरी: ‘सुरों के जादूगर’ मोहम्मद रफी की इस कला ने उन्हें हर दिल का में खास जगह दिला दी

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आज भारतीय सिनेमा के जाने-माने गायक मोहम्मद रफी की 94वीं बर्थ एनिवर्सरी है। इस खास मौके पर हर कोई उन्हें अपनी-अपनी तरह से याद कर रहा है। कोई उनके गाने गा रहा है तो कई उनके अनकहे किस्से याद कर रहा है। हालांकि बॉलीवुड लाइफ हिन्दी आपको मोहम्मद रफी के बारे में एक ऐसी बात बताने जा रहा है, जो आपको चौंकाकर रख देगी।
मोहम्मद रफी साहब ने अपने सालों लम्बे करियर में कई सारे गाने गाए और कई कलाकारों को अपनी आवाज दी लेकिन उनके गानों की खास बात यह रहती थी कि वो हर गाने को अलग ढंग से गाते थे। ऐसा वो इसलिए नहीं करते थे क्योंकि उन्हें किसी से बेहतर दिखना होता था बल्कि वो ऐसा इसलिए करते थे क्योंकि वो हर कलाकार के मुताबिक गाना गाते थे। इससे उस कलाकार को स्क्रीन पर परफॉर्म करने में मदद मिलती थी।
धर्मेंद के इस गाने को रिकॉर्ड करते समय जमकर नाचे थे मशहूर गायक मोहम्मद रफी !!
उदाहरण के तौर पर आप धर्मेंद्र का 'मैं जट्ट यमला पगला दीवाना' गाना ही ले लीजिए, इसे आप अगर ध्यान से सुनेंगे तो पाएंगे कि रफी साहब ने इस गाने को एक दम धर्मेंद्र के मुताबिक गाया है। जैसा धर्मेंद्र का व्यक्तित्व है, रफी साहब ने उसी तरह से इस गाने को गाया है।
देखें रफी साहब के गाने:
इसके दूसरी तरफ अगर आप शम्मी कपूर का 'चाहें मुझे कोई जंगली कहे' को सुनेंगे तो पाएंगे कि मोहम्मद रफी साहब ने गाते वक्त कलाकार के डांसिंग स्टाइल को पूरा ध्यान रखा है। असल में शम्मी कपूर गाते वक्त अपने शरीर के साथ-साथ गर्दन का खास उपयोग करते थे। अगर आप यह गाना ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि मोहम्मद रफी साहब ने हर एक लाइन को शम्मी कपूर के मुताबिक अदाएं दी हैं। इससे ना केवल शम्मी कपूर इस गाने पर अच्छी तरह से परफॉर्म कर पाए बल्कि यह गाना भी यादगार बन गया। मोहम्मद रफी साहब की इसी काबीलियत ने उन्हें हर दिल अजीज बना दिया और उनके गुजर जाने के सालों बाद भी लोग उन्हें भूले नहीं है। वैसे आपको मोहम्मद रफी साहब का कौन सा गाना सबसे ज्यादा पसंद है, हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

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